दशग्रीवा रावण और मैं

  #दशग्रीवा_रावण_और_मैं (विजयदशमी विशेष)pic via- https://www.artstation.com/artwork/obkaW     कल रात मैं अपना ज़रा सा स्वस्थ बिगड़ने के कारण थोड़ा बेचैन सा था । ऊपर से ये भी सोच मेरे दिमाग को आराम नहीं करने दे रही थी कि कल विजयदशमी है और मुझे उस दुराचारी रावण के लिए कुछ बहुत बुरा लिखना है जिससे मैं…

बड़ी मुश्किल से साहस जुटा पाई हैं इन्हें अपने तरीके से लड़ने दीजिए

      सुनो, कसम है तुम्हे अपनी मर्दानगी की जो इन लड़कियों के साथ खड़े हुए, कसम है तुम्हे अपनी उस गदरायी जवानी कि जो तब तब तुम्हारे अन्दर ऐंठती है जब जब तुम किसी लड़की को टाईट कपड़ों में देखते हो, तुम उन लड़कियों की भीड़ का हिस्सा नहीं बनोगे । छोड़ दो…

जय माँ 

#जय_माँ 🙏 आज से शारदीय नवरात्रों का आरंभ हुआ है । भक्ति अपने चरम पर है । आज से हर तरफ़ माता के भक्त माता की पूजा आराधना में लीन नज़र आएंगे । स्त्रीशक्ति का प्रबल प्रतीक हैं ये नवरात्रे । जब हम ब्रह्मा, विष्णु, महेश और उनके अवतारों को सर्वशक्तिमान मान कर उनकी भक्ति…

​सड़क किनारे हिंदी माँ (हिंदी दिवस विशेष)

#सड़क_किनारे_हिंदी_माँ (हिंदी दिवस विशेष) इतवार का दिन मनाने के लिए हम बाज़ार टहलने (अपनी फटफटिया पर चलने को भी हम टहलना ही कहेंगे क्योंकि यह पैदल चलने वालों से थोड़ा ही धीमा चलती है) निकल पड़े । राशन बिजली पानी यहाँ तक की विसर्जन इत्यादि का बिल भुगतान करने के बाद जेब में जितना बचता…

डर कर चुप मत बैठिए सवाल करिए 

#डर_कर_चुप_मत_बैठिए_सवाल_करिए  आज रविवार है, मने फन डे, मज़े करने का दिन । “मम्मी ये बना दो, मम्मी पापा को बोलो ना मूवी ले जाएंगे, मम्मी खेलने जाने दो ना प्लीज़ शाम को होम वर्क कर लूंगा” जैसी फरमाईशों का दिन । और मम्मियाँ पूरा भी करेंगी लेकिन सिर्फ वो मम्मियाँ जिन्होंने उस मासूम की अधकटी…

​आपकी निरर्थक खुशी हत्यारों का मनोबल बढ़ा रही है 

#आपकी_निरर्थक_खुशी_हत्यारों_का_मनोबल_बढ़ा_रही_है  मैने गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में लिखी पोस्ट में साफ तौर पर कहा था कि वो कौन है, उनके विचार क्या हैं इन सब बातों से अलग मैं केवल और केवल उनकी हत्या का विरोध करता हूँ । हत्यारातंत्र का मनोबल बढ़ता चला जा रहा है । बात सिर्फ पत्रकारों की नहीं…

​राजनीति का कीड़ा कहीं आपकी सोच को मार तो नहीं रहा ?

जनाब, लगाव यहाँ किसको है ही किस से । सब अपने आप में मस्त हैं । यहाँ अपनों की मौत का मातम तेरहवीं भर मनाते हैं लोग और जिस तरह हम उन्हें वैसे ही हमारे बाद हमें भी भुला देते हैं लोग । और भुला भी क्यों ना दें किसी के दुःख में इंसान इस…