फ़ासला सुकून भर का (कहानी बातों बातों में)

. ” खाना भी नही खानो दोगी तुम ? तरस खाओ मुझ पर | सारा दिन बिज़नस की टेंशन लो, तुम लोगों के लिए कोल्हू का बैल बने रहो और जब कुछ पल चैन के जीने घर आओ तो तुम्हारी किचकिच सुनो । आदमी ही हूँ यार मशीन नहीं |”   ” हाँ हाँ मै…

साढ़े तीन आँखें

#साढ़े_तीन_ऑंखें (लंबी कहानी)     रास्ते अलग थे मगर एक ठहराव सा था जहाँ दोनों की साढ़े तीन आँखें अक़सर मिल जाया करती थीं । हाँ, साढ़े तीन ही तो । सबके लिए तो चार थीं मगर मेघा को उसकी बाईं आँख से धुंधला सा दिखता था । इधर धनंजय की दो आँखें और मेघा…

हम गलत थे बिटिया (कहानी)

    #हम_गलत_थे_बिटिया (कहानी)     “बाऊ जी हमको और पढ़ना है । हमको बाहार जा लेने दीजिए ।” दस दिन से मुंह फुलाओं के बाद आज आखिर नेहा अपने पिता रघुनाथ जी के आगे बोल ही पड़ी ।   रघुनाथ जी अपनी इकलौती बिटिया से प्रेम तो बहुत करते थे मगर आज कल के…

कौन मजबूत कौन बेबस

#कौन_मजबूत_कौन_बेबस  “पता लगा आज मार्केट गयी थी ?” गुस्से में लाल आँखों को खाने की थाली पर टिकाए संदेह ने सावित्री से पूछा । सावित्री अवाक थी क्योंकि संदेह से वो अच्छे से परिचित थी । उसे पता था संदेह के मन में कोई बात आगयी तो वो सावित्री पर लांछन लगाते नहीं चूकेगा ।…

क्या इसता ही था प्यार

#क्या_इतना_ही_था_प्यार_?  (केवल व्यस्कों के लिए छोटी उम्र और छोटी सोच वाले ना पढ़ें) “मैम जी सुनिए तो, इतना भी क्या गुस्सा जी । एक बार बात तो सुन लो ।” निलिमा ने बीस से ज़्यादा बार इस आवाज़ को सुना होगा । हर बार वो इतना सुनते काट देती और उधर से हर बार नए…

​इंजीनियर चौबे की यस से नो तक की कथा (इंजीनियरिंग डे विशेष)

#इंजीनियर_चौबे_की_यस_से_नो_तक_की_कथा (इंजीनियरिंग डे विशेष) “फलां चच्चा को देख ले इंजीनियर है अगला । कितनी ऐश मौज में रहता है । बेटा बस कुछ साल की मेहनत है उसके बाद तो ज़िंदगी बहुते आराम से कटेगी ।” बाऊ जी बड़े प्यार से समझाये थे घनश्याम चौबे को ।  घनश्याब चौबे अबोध था (जो कि एक पैदाईशी…

जितिया (कहानी बदलाव की)

#जितिया (कहानी बदलाव की ) “लत्ती सी लतरती जा रही है, अब इसका बिआह कर दो, या समय हाथ से निकल जाने के बाद सारी उमर पछताने का मन बना लिये हो ।” नये चूल्हे को लेपती चंपा ने अपनी नई चूड़ियों की खनक से उठ रहे संगीत में अपने कर्कश स्वरों के साथ वही…

कलेक्टर बन जाएगा सब सही हो जाएगा 

#कलेक्टर_बन_जाएगा_सब_सही_हो_जाएगा (कहानी) “पता नहीं कौन जनम का पाप किए हैं जो ऐसा जिनगी मिला हम लोगों को । सारा दिन लोग सब के घर का झाड़ू बहाड़ू करो और फिर अपना घरे आ कर मरो ।” सुषमा ऐसे ही चिड़चिड़ा जाया करती थी जब कभी वो ज़्यादा परेशान होती तो । आज भी डाॅक्टराईन जिसके…

विभू सीख चुका था 

#विभू_सीख_चुका_था (कहानी) चिड़ीयों की चहचआहट के साथ ही प्रकृति किसी नवयौवना के समान एक मादक अंगड़ाई के साथ अपने सजल नयन खोलती है जिससे पेड़ों की पत्तियाँ और हरी घास ओस की बूंदों से सज जाती है । ठंडी ठंडी बह रही हवा ऐसी प्रतीत होती है मानों जैसे दासियाँ किसी राजकुमारी के सिरहाने उसके…

इसे कहते हैं साथ साथ जीना

#इसे_कहते_हैं_साथ_साथ_जीना (कहानी) “मेरे प्यारे हब्बी जी” स्नेहा ने सोये हुए रितेश के गालों को प्यार से सहलाते हुए कहा । वैसे तो रितेश की नींद बहुत कच्ची है और उसकी नींद तो स्नेहा के सुबह सुबह हड़बड़ा कर जागने के साथ ही खुल गयी थी मगर फिर भी वो आँखें बंद किये हुए जान बूझ…

कुछ_बातें_कल्पनाओं_से_उधार_ले_कर

# “एक नया रिश्ता ढूँढा है पापा ने ।”  “हम्म्म्म्म ।”  “बस हम्म्म्म्म ?”  “तो और क्या कहूँ ।”  “कुछ मत कहो । चुपचाप बैठे रहो ।” “मेरे कहने से होने भी क्या वाला है । तुमे डर लगता है तो तुम बोलोगी नहीं, मैं बोल भी लूँ तो मेरी कोई सुनेगा नहीं । बताओ…

गंगा माई उसके साथ उसके सारे दुःख बहा कर ले गयी 

#गंगा_माई_उसके_साथ_उसके_सारे_दुःख_बहा_कर_ले_गयी (काल्पनिक कहानी) नदी के समानांतर चल रही पगडंडियों का पड़ाव उस छोटे से जंगल में थोड़ा ठहर जाता था सुस्ताने के लिए । उसी पड़ाव पर सबसे छुपछुपा कर बैठी सरिता से बिसंभर ने बड़े भारी मन से कहा “ए सरिता, तू तो गंगियां माई हो गयी रे ।”  “ऐसा काहे कहते हो ?”…