सूचना

जो दोस्त यहाँ मुझे पढ़ते रहे हैं उन्हें ये बताना चाहता हूँ कि अब मैं इस ब्लॉग पर नहीं लिखता, अपना ठिकाना बदल कर अब qissonkakona.com कर दिया है. इसीलिए जिन दो चार दोस्तों ने मेरा ये ब्लॉग फ़ॉलो किया है उन सब से अनुरोध है कि वो मुझे qissonkakona.com पर फ़ॉलो कर लें.   धन्यवाद…

दशग्रीवा रावण और मैं

  #दशग्रीवा_रावण_और_मैं (विजयदशमी विशेष)pic via- https://www.artstation.com/artwork/obkaW     कल रात मैं अपना ज़रा सा स्वस्थ बिगड़ने के कारण थोड़ा बेचैन सा था । ऊपर से ये भी सोच मेरे दिमाग को आराम नहीं करने दे रही थी कि कल विजयदशमी है और मुझे उस दुराचारी रावण के लिए कुछ बहुत बुरा लिखना है जिससे मैं…

यह रूप भी माता का ही है

#यह_रूप_भी_माता_का_ही_है  “बोंदू , जा बेटा कंजकों को बुला ला । रूनझुन बहन यहाँ गयी हैं सब, वहाँ से सबको बुला लाना ।” पूरियों की आखरी घानी निकालते हुए सुमित्रा ने बोंदू से कहा ।  “जा रहे हैं अम्मा ।” टी वी पर नजरें गड़ाए बोंदू ने कहा । “जल्दी जा रे । सब चली गयीं…

बड़े झा साहब, कष्ट से मुक्त हुए दो साल होगये आज

बड़े झा साहब, कष्ट से मुक्त हुए दो साल होगये आज     “भईया कोनो उपाए बताऊ, पप्पा के मियाज खास क के मंगले के ख़राब होई अ ।” “भाई हम मौसा के जन्मपत्री देखले रहली अ, हुनकर मंगल नीच है ।” “त  एकर कोनो उपाय होए त कहू ?” “मौसा से त हम सिखले…

फ़ासला सुकून भर का (कहानी बातों बातों में)

. ” खाना भी नही खानो दोगी तुम ? तरस खाओ मुझ पर | सारा दिन बिज़नस की टेंशन लो, तुम लोगों के लिए कोल्हू का बैल बने रहो और जब कुछ पल चैन के जीने घर आओ तो तुम्हारी किचकिच सुनो । आदमी ही हूँ यार मशीन नहीं |”   ” हाँ हाँ मै…

साढ़े तीन आँखें

#साढ़े_तीन_ऑंखें (लंबी कहानी)     रास्ते अलग थे मगर एक ठहराव सा था जहाँ दोनों की साढ़े तीन आँखें अक़सर मिल जाया करती थीं । हाँ, साढ़े तीन ही तो । सबके लिए तो चार थीं मगर मेघा को उसकी बाईं आँख से धुंधला सा दिखता था । इधर धनंजय की दो आँखें और मेघा…

कुछ तुम बदल गए कुछ हम बदल गए

कुछ तुम बदल गए कुछ हम बदल गए   ************************************ बहुत कुछ बदल गया… इन पाँच सालों में… बड़ा फ़र्क आगया है तुम्हारे मेरे ख़यालों में तुम्हे यूँ अचानक देख कर कुछ पल के लिए दहल गए   इन चंद सालों में कुछ हम बदल गए… कुछ तुम बदल गए…   अब तुम्हारे जिस्म से…

हम गलत थे बिटिया (कहानी)

    #हम_गलत_थे_बिटिया (कहानी)     “बाऊ जी हमको और पढ़ना है । हमको बाहार जा लेने दीजिए ।” दस दिन से मुंह फुलाओं के बाद आज आखिर नेहा अपने पिता रघुनाथ जी के आगे बोल ही पड़ी ।   रघुनाथ जी अपनी इकलौती बिटिया से प्रेम तो बहुत करते थे मगर आज कल के…

बड़ी मुश्किल से साहस जुटा पाई हैं इन्हें अपने तरीके से लड़ने दीजिए

      सुनो, कसम है तुम्हे अपनी मर्दानगी की जो इन लड़कियों के साथ खड़े हुए, कसम है तुम्हे अपनी उस गदरायी जवानी कि जो तब तब तुम्हारे अन्दर ऐंठती है जब जब तुम किसी लड़की को टाईट कपड़ों में देखते हो, तुम उन लड़कियों की भीड़ का हिस्सा नहीं बनोगे । छोड़ दो…

जय माँ 

#जय_माँ 🙏 आज से शारदीय नवरात्रों का आरंभ हुआ है । भक्ति अपने चरम पर है । आज से हर तरफ़ माता के भक्त माता की पूजा आराधना में लीन नज़र आएंगे । स्त्रीशक्ति का प्रबल प्रतीक हैं ये नवरात्रे । जब हम ब्रह्मा, विष्णु, महेश और उनके अवतारों को सर्वशक्तिमान मान कर उनकी भक्ति…

ईमान में रहे तो रहे कौन

सुलगते आग का टुकड़ा हूँ, आग़ोश में ले तो ले कौन गर्म हवा हूँ जेठ की मेरी छुअन को सहे तो सहे कौन भले ही नेक काम किए सब का दिल ए अज़ीज़ रहा मगर अब लाश हो चुका हूँ घर अपने रखे तो रखे कौन मैं जब अपनी राह चला तो बहुत आए हमसफ़र…

कौन मजबूत कौन बेबस

#कौन_मजबूत_कौन_बेबस  “पता लगा आज मार्केट गयी थी ?” गुस्से में लाल आँखों को खाने की थाली पर टिकाए संदेह ने सावित्री से पूछा । सावित्री अवाक थी क्योंकि संदेह से वो अच्छे से परिचित थी । उसे पता था संदेह के मन में कोई बात आगयी तो वो सावित्री पर लांछन लगाते नहीं चूकेगा ।…