जब_तक_बलात्कार_ना_हो_जाए_तब_तक_मुँह_मत_खोलना

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#जब_तक_बलात्कार_ना_हो_जाए_तब_तक_मुँह_मत_खोलना
अच्छा, बड़ी शर्मिंदगी के साथ सभी लड़कियों के लिए एक सलाह देना चाहूँगा कि अगर कोई लौंडा, कोई बिगड़े बाप की कमीनी औलाद, कोई नशेड़ी, कोई भेड़िया तुम सब पर बुरी नज़र डालता है तो चुप चाप स्माईल कर के निकलने की कोशिश करना । उसके खिलाफ़ अगर एक शब्द भी बोला तो तुम्हारी अगली पिछली सारी कुन्डली खोल दी जाएगी । तुम अगर हीर राँझे से प्रेरित किसी के साथ सच्ची मोहब्बत कर रही होगी तो तुम्हें बद्चलन कहा जाएगा, तुमने कभी एक दो शाॅट लगा लिये होंगे और वो फोटो कहीं एफ बी पर अप्लोड हो गयी होगी तो तुम्हें पियक्कड़ कहा जाएगा, हो सकता है तुम रंडी भी कहला जाओ और उसके बाद जितनी शर्मिंदगी आपको उन लफंगों के छोड़ने से नहीं हुई होगी उससे कहीं ज़्यादा अपने ही चरित्र पर उछाले गये कीचड़ के धब्बे देख कर होगी । 
और कहीं वो लफंगा, नशेड़ी किसी पार्टी के माननीय मंत्री जी (‘जी’ का मतलब आप अपनी ज़ुबान की सुविधानुसार तय कर सकते हैं ) का राजदुलारा हुआ फिर तो आप चूं तक ना करें । हाँ अगर वो लफंगे आपको पकड़ने के बाद हैवान बन कर आपका बलात्कार कर के आपके शरीर को टुकड़ों में बाँट कर जलाने में कामयाब हो जाते हैं फिर आपकी आत्मा जो खुद सौ बार मर चुकी होगी वो कराहने के लिए आज़ाद है, और फिर तो हम भी आज़ाद होंगे आपके हक़ में आवाज़ उठाने के । मतलब कम शब्दों में कहूँ तो जब तक आपका हाल निर्भया, नैंसी, गुड़िया या उन जैसी हज़ारों बच्चियों जैसा भयानक नहीं हो जाता तब तक आप चुप ही रहें तो अच्छा है । 
 हाँ एक चीज़ और अगर आपके पिता सरकारी नौकर हैं, किसी बड़ी पोस्ट पर हैं और वो सक्षम हैं आपके खिलाफ हुई छेड़छाड़ के खिलाफ आवाज़ उठाने में तो उन्हें सख़्त मना कर दें कि वो एक लफ्ज़ ना बोलें । क्योंकि अगर वो बोले तो मीडिया ईशू बन जाएगा और हर जगह ये कहा जाएगा कि अफ़सर की बेटी थी इसी लिए मीडिया इतना बोल रही है । ग़रीब की बेटी के हक़ में कोई बोलेगा नहीं, अफ़सर को अपनी बेटी के साथ हुई छेड़छाड़ के मामले में दूसरी बच्चियों को आगाह नहीं करने दिया जाएगा बस हो गया “विकास” के रास्ते का रोड़ा अपने आप हट जाएगा । 
और अंतिम सलाह कि अगर आपने कभी सुट्टा लगाया है या कभी काॅकटेल के शाॅट लगाये या आप देर रात बाहर निकल रही हैं घर से तो फिर आपको छेड़ने का आपसे बलात्कार करने का पूर्ण अधिकार है किसी को भी । आपके कपड़े अगर छोटे हैं तो कोई भी आपके कपड़ों के अंदर झांक कर अपनी आँखों में नंगी हवस जगाने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र है । सो देख लीजिए अगर आप ऐसा कुछ करती हैं तो फिर हैवानियत आज़ाद है आपके साथ मनचाहा सलूक करने के लिए । 
अच्छा बहुत ज्ञान दे लिया अब एक आख़री बात उन अच्छे लोगों से जिनकी नज़रों में अच्छा या बुरा इस बात पर टिका होता है कि अच्छा या बुरा करने वाला कहीं उस पार्टी से तो नहीं जिसके हम कट्टर समर्थक हैं । नवाब देवबंदी साहब आप सबके लिए ही कुछ फरमाते हैं ग़ौर फरमाईएगा 
जलते घर को देखने वालों फूस का छप्पर आपका है

आपके पीछे तेज़ हवा है आगे मुकद्दर आपका है
उस के क़त्ल पे मैं भी चुप था मेरा नम्बर अब आया

मेरे क़त्ल पे आप भी चुप हैं अगला नम्बर आपका है
तीन साल पहले हम सब ने एक चिंगारी को यह सोच कर एक साथ हवा दी थी कि वह मशाल बन जाए और अंधेरा जो फैला हुआ है उसे दूर करे मगर देखते ही देखते वो विरोधी हवा जो मशाल बुझाने में लगी थी उसी ने मशाल को गिरा कर आग में बदल दिया और देखते देखते आग फैलने लगी जिसके हाथ में मशाल थी वो चुपचाप बैठ गये और आग अहंकार में चूर बढ़ती चली गयी । अब तो वो आग इतनी फैल गयी है कि हवा जब भी उसे बुझाने उठती है उल्टा उस आग को और बढ़ा देती है । 
आप तालियाँ पीट रहे हैं आग से उठने वाली रौशनी को देख कर क्योंकि आपका घर अभी चपेट में नहीं आया । आप उस आग को और बढ़ा रहे हैं भिना ये सोचे कि मशाल आपके हाथ तक रहती मगर ये आग तो किसी की सगी नहीं ना जाने कब कहाँ कैसे किसके घर को अपनी आग़ोश में ले ले । तब कहाँ जाएंगे आप ? किससे फरियाद करेंगे । 
समर्थन और विरोध से ऊपर उठिए साहब सही और ग़लत को पहचानिये । जो लब बोलना चाहते हैं उन्हें बोलने दीजिए । ऐमरजैंसी पर लानत फेरने वाली अपनी इस ज़ुबान से दूसरी ऐमरजेंसी वाला माहौल ना बनाएं तो बेहतर होगा । ये साँप हैं, इनके सपोले भी साँप ही बनेंगे और साँप का क्या पता कब किसे काट खाएं । 

धीरज झा

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