#मुझे_अभी_ये_नहीं_सोचना_कि_सन्नी_लियोन_कौन_है

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#मुझे_अभी_ये_नहीं_सोचना_कि_सन्नी_लियोन_कौन_है 
तकरीबन छः साल पहले की बात होगी जब पंजाब से एक बार गाँव को जा रहा था । ट्रेन मुज़्जफरपुर तक थी और उसके बाद सीतामढ़ी के लिए बस लेनी थी । मुज़्जफरपुर स्टेशन से बैरिया बस स्टैंड के लिए जब ऑटो ढूंढा तो पता चला कि आज किसी तरह का जाम है तो ऑटो मिलना मुश्किल है । मैं “क्या करूं” वाली बात में फंसा हुआ था तभी एक रिक्शा वाला बोला कि साहब हम छोड़ देंगे । उम्र कोई तीस बत्तीस के करीब की रही होगी उसकी । मैने भी सोचा चलो रिक्शा तो इधर उधर से निकाल ही लेगा, थोड़ा वक्त लगेगा मगर मैं पहुंच तो जाऊंगा । इसी के साथ मैं उसके रिक्शे पर बैठ गया । 
आगे बढ़ा तो जाम सच में बहुत भयानक था । फिर भी रिक्शे वाला इधर उधर से निकाल कर आगे बढ़ने लगा । अभी तक मुझे वो सिर्फ एक रिक्शे वाला लग रहा था, मेरा ध्यान ना उसकी वेशभूषा पर था ना ही उसके बदन से धार के रूप में बह रहे पसीने पर । चलते चलते बातें होने लगीं और बातों बातों में पता चला कि उसके दो बच्चे हैं जिनकी पढ़ाई के लिए वो जी तोड़ मेहनत करता है । मैने उससे पूछा की वो अपने बच्चों को क्या बनाना चाहता है तो उसका जो आगे से जवाब आया उसे सुन कर मैं एकदम निःशब्द हो गया । 
उसने जवाब दिया “ये तो पता नहीं साहेब कि क्या बनेगा बगर हाँ मैं हर कोशिश कर के कड़ी मेहनत कर के उन्हें इतना तो ज़रूर पढ़ा लिखा देना चाहता हूँ जिससे वो एक सभ्य इंसान बन जाएं, कम से कम मुझ जैसे कीड़े मकौड़े ना रहें । हमारी औकात किसी किड़े मकौड़े से ज़्यादा थोड़े है साहब, किस जिए जन्में किस लिए जी रहे हैं किस लिए मर जाएंगे कोई पता नहीं । हाँ मगर मेरे बच्चे ऐसे नहीं जीएंगे ।” उसका जवाब मेरे कानों में आज भी गूंजता है । 
आप एक काम करिए, अपने आस पास किसी भी ठेले वाले से, किसी मज़दूर से, किसी मेसत्तर से, संभव हो तो उस औरत से भी जो ना जाने किस कारण से अपना देह बेचती है पूछिए कि वो अपने बच्चे को क्या बनाना चाहेंगे । ये तो नहीं कह सकता कि उनका जवाब क्या हो सकता है मगर ये मैं विश्वास से कह सकता हूँ कि किसी का जवाब ये नहीं होगा कि वो जो कर रहे हैं वही अपने बच्चे से भी करवाएंगे । 
किसने किन परिस्थितियों में कौन सा धंधा शुरू किया इसका अंदाज़ा आप बिल्कुल नहीं लगा सकते । वो इंसान जो किसी भी तरह के दलदल में है वो उसमें अपने बच्चे को कभी नहीं खींचना चाहेगा (बशर्ते वो वास्तव में इंसान ही हो) । 
आज ही खबर सुनी कि सन्नी लियोन और उनके पति ने एक बच्ची को गोद लिया है । ‘बताईए कि कितना गलत किया इन दोनों ने । भला इन्हें क्या हक़ था एक अनाथ बच्ची को गोद लेने का । अगर ये गोद ना लेती तो वो बच्ची अपने भाग्य भरोसे जैसे जीना होता जीती मगर सन्नी ने उसे गोद लेकर तो फाप कर दिया ।’ 
माँ बाप कोई भी हो वो कभी नहीं चाहते कि उनका बच्चा कुछ ऐसा काम करे जिससे समाज में उसकी गलत छवि बने । यहाँ तक कि खुद सन्नी लियोन के माता पिता ने भी कभी ये नहीं चाहा होगा कि उनकी बेटी एक पार्नस्टार बने । उसी तरह सन्नी भी कभी ये नहीं चाहेंगी कि जिस बच्ची को उन्होंने अपना नाम दिया वो उनकी तरह ही कोई ऐसा काम करे । बाकि किरनजीत कौर अगर आज सन्नी लियोन है तो उसका कारण भी यह सभ्य समाज ही है, जिसकी छुप कर पार्न देखने की लत ने सन्नी लियोन को इतना फेमस कर दिया कि वो 2014 में गूगल पर सबसे ज़्यादा सर्च की गयी ।
मुझे अभी ये नहीं सोचना कि सन्नी लियोन क्या हैं, कौन हैं । मैं बस इतना जानता हूँ कि वो अब एक माँ हैं और इसने लातूर के अनाथालय से एक 21 महीने की बच्ची को गोद ले कर उसे अपनी बेटी बनाया और उसका नाम निशा कौर वेबर रखा है । जिसके लिए मैं उन्हें दिल से बधाई देता हूँ और साथ ही साथ यह शुभकामना भी देता हूँ कि वह एक बेहद अच्छी माँ साबित हों और उस बच्ची जिसका भविष्य कुछ समय पहले तक अंधकार में था अब उज्वल हो । 

धीरज झा

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