देश को अपाहिज मत बनाईए 

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#देश_को_अपाहिज_मत_बनाईए
बड़ा दुःख होता है ये देख कर कि कुछ लोगों को लगता है मेरा देश अपाहिज हो गया है । मैं ये कभी नहीं मानता मगर कुछ संदेश, कुछ पोस्ट ऐसे देखता हूँ तो सच में लगता है कि कुछ लोगों ने सच में देश को अपाहिज घोषित कर दिया है । 
आए दिन भारत एक मुस्लिम देश बन जाएगा जैसे संदेश और पोस्ट बहुत देखने को मिल रहे हैं । हमला हुआ है, गुस्सा सबका जायज़ है, मैं खुद मन इस हमले को वैसे ही नहीं भूल पा रहा हूँ जैसे आज तक बाकि के हमले नहीं भुला पाया । इस हालत में हमें एक दूसरे की हिम्मत ना कि ऐसे बेहूदा किस्म के डर से एक दूसरे को भयभीत करना चाहिए । 
इसी मैसेज के अंत में लिखा होता है मोदी का विरोध करने का नतीजा है । अगर मोदी ना रहे तो देश इस्लामिक कंट्री बन जाएगा । मैं माननीय प्रधानमंत्री जी की दिल से इज्ज़त करता हूँ, जहाँ तक हो पाया हमेशा समर्थन भी किया । मगर इसका ये मतलब नहीं कि देश को अपाहिज मान कर मैं उन्हें देश की बैसाखी मान लूं । 
देश की जनता उसे अपना प्रधानमंत्री चुनती है जो देश की हर व्यवस्था को सही से चला सके । अगर जनता को लगता है कि किसी भी व्यवस्था में चूक हुई है तो सवाल करना, विरोध करना (सही तरीके से ) जनता का अधिकार है । मैं किसी पार्टी से जुड़ा नहीं हूँ फिर भी मैने नरेन्द्र मोदी जी को विजयी बनाने के लिए 53 वोट जोड़े थे सिर्फ इसीलिए क्योंकि मुझे कांग्रेस का काम पसंद नहीं आया । मेरा अधिकार था, मुझे बदलाव चाहिए था इसीलिए मैने बिना किसी रैली में शामिल हुए बिना दर दर घूमें बस अपने जान पहचान वालों को मोदी जी को वोट देने के लिए राज़ी किया । मैं अकेला नहीं मुझ जैसे बहुत थे जिन्होंने बिना किसी लालच के ये काम किया । क्योंकि उन्हें भी बड़े बदलाव की चाह थी । 
मगर इसका ये मतलब नहीं कि मैं प्रधानमंत्री जी पर ही आश्रित हो जाऊं ये सोच कर कि वो जब तक रहेंगे तब तक ही मैं सुरक्षित हूँ । हमले पहले भी हुए हैं, दंगे पहले भी भड़के हैं बस ये फेसबुक नहीं था, जिओ की तरफ से नेट फ्री नहीं था, मीडिया इतनी चरित्रहीन नहीं हुई थी इसीलिए हल्ला कम लगता था । मैं देश के बिगड़ते हालात को ले कर सवाल करूंगा प्रधानमंत्री जी से इस विश्वास के साथ कि वो मेरे सवाल का जवाब ज़रूर देंगे क्योंकि मैने उन्हें चुना है बड़े उमंग के साथ, अच्छा बुरा देख कर उनकी प्रशंसा और उनसे सवाल करना मेरा अधिकार है । 
बाकि रही डरने की बात तो एक बात का जवाब मैं सबसे चाहूंगा, बहुत से दुश्मन होंगे आपके, आप पर हमला भी हुआ होगा चाहे बातों से हो या हथियारों से, तो क्या आपने अपना घर अपने दुश्मन को दे कर उस पर उसका हक़ हो जाएगा सोच लिया ? पुरखे कह गये हैं कि जर जोरू और ज़मीन के लिए अपने प्राणों की परवाह किये बिना लड़ जाओ । तो भला मैं अपना देश किसी के हाथों में ऐसे कैसे सौंप दूंगा । ऐसे ही कोई कैसे आएगा और मेरी गर्दन काट कर चला जाएगा ? कभी ऐसा मौका आया तो मेरी गर्दन कटने से पहले मैं पाँच सर उतार कर मरूंगा । इसीलिए मुझे ये डर कभी नहीं सताता कि मेरा घर मेरा शहर मेरे देश को कोई अपना बना लेगा और ना मैं इस डर से लड़ने के लिए किसी एक इंसान का सहारा लेना पसंद करता हूँ । 
मेरी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे तो जब तक ज़िंदगी है मैं तक उनकी जीत के लिए जी जान लगा दूंगा और अगर नहीं उतरेंगे तो उनके खिलाफ़ जाते भी देर नहीं लगेगी मुझे । देश सबसे पहले है, मुझे सरकार ने खैरात में नौकरी दी या नहीं दी, मुझे सरकार का फेंका राशन मिला या ना मिला, नोटबंदी के बाद जमा हुए काले धन का एक रूपया मैने पाया या नहीं पाया इन सबसे फर्क नहीं पड़ता पड़ता है तो इस बात से पड़ता है कि जिस देश के भले और विकास के लिए मैने जिसे चुना था उसने मेरे देश का विकास किया या नहीं किया । अगर किया तो उनकी उम्र लम्बी हो जिससे वो कुछ समय और देश का विकास कर पाएं और नहीं किया तो घर पर बैठ कर आराम करें हम कोई और ढूंढेंगे ।
देश को मुंडेर पर बैठा वो साधू और मोदी जी को वो भगवान ना बनाईए जिसके आसरे पर साधू बाढ़ के बढ़ते पानी में ये ज़िद्द ठान कर बैठ गया कि जब तक भगवान स्वयं आकर मुझे नहीं बचाएंगे मैं यहाँ से नहीं हिलूंगा भले ही कितने नांव मुझे बचाने आजाएं, भले ही मैं कितना कुशल तैराक हूँ । आलोचनाएं होने दीजिए सवाल पूछे जाने दीजिए, अगर आपको उन पर विश्वास है तो वो सुधार भी करेंगे और जवाब भी देंगे और अगर सुधार करने और जवाब देने में सक्षम नहीं हैं तो भईया जय सिया राम । 
बाकि मैं हिन्दू हूँ कट्टर हूँ या नहीं ये वो महादेव जानते हैं जो मेरे आराध्य हैं  और मुझे उन मुस्लमानों से नफ़रत है जो हर दंगे का हिस्सा हैं जिनके मन में ये ख़याल पलता है कि वो इस देश को इस्लामिक बना देंगे । और इसी तरह मुझे हर उस झूठे हिन्दू से भी नफरत है जो धर्म के नाम की राजनीति करता है और लोगों के दिलों में डर बोने का काम करता है । 
बाकि ये मेरे विचार हैं इससे किसी की भावनाएं आहत होती हैं तो आज मुझ कुछ खास फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि मेरा घर किसी की झूठी जय जयकार से या लोगों के मन में डर बोने से नहीं चलता । 
हर हर महादेव कहिए 
धीरज झा

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