​#और_नारीवाद_का_नकली_झंडा_गिर_गया

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​#और_नारीवाद_का_नकली_झंडा_गिर_गया 
“दिदिया मेरे पिता जी कह रहे हैं अब आगे मत पढ़ो । ज़्यादा पढ़ लोगी तो हमारी हैसीयत का लड़का मिलना मुश्किल हो जाएगा । क्या आप कुछ कर सकती हैं ।” बी. ए सैकेंड पार्ट की एक बेबस कन्या ने बी.ए थर्ड पार्ट की एक लड़की से कहा ।
“क्या नाम है तेरा लड़की ?” अपने सीनियरता का रुबाब झाड़ते हुए, हवा की लहरों से खुद को बचाने का प्रयास करती हुई उस लड़की ने उस कन्या से पूछा
“रुपाली ।”
“हूं, चल मेरे साथ ।”
लड़की उस कन्या को अपने हाॅस्टल के रूम में ले गई । रूम में घुसते ही रुपाली को अपने फोल्डिंग पर बैठने का इशारा कर के खुद अपना लंबा हाथ छज्जी की तरफ बढ़ाते हुए वहाँ रखी अटैची के पीछे से सिगरेट की डिबिया निकाली और उसमें से एक सिगरेट निकाल कर सुलगा ली ।
“देख रूपस तेरा पिता भी एक मर्द है और इन मर्दों का काम है बस हम लड़कियों को आगे बढ़ने से रोकना । क्योंकि ये जानते हैं हम आगे बढ़ गये तो इनका बपौती हक़ खतरे में आ जाएगा । मगर हमें डरना नहीं है । इनका जम कर विरोध करना है ।” दो कश के बाद उस लड़की ने रुपाली की तरफ सिगरेट बढ़ाई । मगर रुपाली का तो दूर से ही सिगरेट के धुएं से दम घुट रहा था सिगरट के पास आते तो वो जैसे मरने की हालत में आगयी । 
“क्या तुम सिगरेट नहीं पीती ?” चौंक कर लड़की ने रुपाली से पूछा । रुपाली ने ना में सर हिलाया ।
“हुंह, इसी लिए मर्दों खुद को आगे मानते हैं । तुम सिगरेट नहीं पीती तो शराब का सवाल ही नहीं और सेक्स पर बात करना तो तुम्हें पाप लगता होगा । ये करेंगी मर्दो से बराबरी । हिं हिं हिं हिं ।” उस लड़की की हंसी पौराणिक कथाओं पर आधारित धारावाहिकों में अपना मायावी रूप बदलने के बाद हंसने वाली राक्षसियों की याद ताज़ा कर रही थी । 
“दिदिया मैं ये सब जानने नहीं आई मुझे तो बस तरीका बताईए कि मैं अपने पिता जी को आगे पढ़ने के लिए कैसे मनाऊं । मुझे कुछ करना है । मेरी पाँच बहने हैं मुझे उन सबका सहारा बनना है । मुझे इस सोच का जड़ से खातमा करना है कि एक बेटा ही सारी ज़िम्मेदारियाँ उठा सकता है ।” 
“उसके लिए तुम्हें मर्दों के बराबर होना होगा । अपने पिता के आगे तुम शराब पी कर जाओ । हर तरह की बात करो जिससे उन्हें समझ आए कि तुम लड़कों से कम नहीं ।” इतने में लड़की का फोन बज उठा । 
“हैलो ? हाँ डार्लिंग । हाँ हाँ आज रात नौ बजे याद है मुझे । मैं तैयार रहूंगी । ओके बाबा जिस तरह तुम कहो वैसे ही करेंगे । आज खूब धमाल होगा । हाँ तुम्।आरे ही रूम पर रुकूंगी । चलो ठीक है मिलते हैं ।” शायद लड़की के ब्वाॅय फ्रेंड का फोन था । लड़की ने फोन रखने के बाद अपना बचा खुचा ज्ञान रुपाली को देने के लिए उसकी तरफ मुड़ी मगर रुपाली वहाँ से जा चुकी थी । 
“हुंह, ब्लडी कमज़ोर गर्लस ।” अपने पिचके मुंह को टेढ़ा कर के मुस्कुराती हुई उस लड़की ने मन ही मन रुपाली को कोसा और फिर दूसरी सिगरेट जला ली ।
उस रात अपने ब्वाॅय फ्रेंड के रूम पर लड़की ने कई दांव पेचों से पुरुषवाद को पछाड़ते हुए नारीवाद का नारा बुलंद  किया और फिर थक कर पुरुषवाद की बाहों में खुद को सौंप दिया । 
दो दिन बाद 
“अरे ओ लड़की, इधर आ । क्या नाम था तेरा ? रुपाली ना ? तो क्या हुआ तेरे आगे पढ़ने का ? तेरा बाप माना तो होगा नहीं । आखिर एक पुरुष जो ठहरा ।” 
“हाँ दिदिया, मेरे पिता जो एक पुरुष हैं वो मुझसे जो कि एक नारी हूँ से मुस्कुराते हुए हार गये और बोले कि ‘ठीक है बटिया जितना पढ़ सके उतना पढ़ । हमें भी तो एक होनहार बेटी के माँ बाप होने का सौभाग्य मिले । वैसे भी रिश्तेदार हंसते हैं यह कह कर कि तुम्हारा कोई बेटा नहीं है  और ये बेटियाँ तुमें पूछेंगी भी नहीं शादी के बाद तब देखेंगे कौन काम आता है बुढ़ापे में ।’ 
“दिदिया मुझे सच में मर्दों की बराबरी करनी हैं मगर सिगरेट पी कर शराब पी कर या सेक्स की भूख दिखा कर नहीं बल्कि खुद को काबिल बना कर, खुद को उस मुकाम पर ले जाकर जहाँ एक लड़का मुझसे शादी करने के पहले ये देखे कि वह मेरे काबिल है या नहीं । आप हम सब से बड़ी हैं आप में बात सामने रखने की काबिलियत है । अगर आप हम जैसी गांव की लड़कियों के माता पिता को समझाएं हमारे हक़ में आवाज़ उठाएं, हमें लड़कों के बराबर शिक्षा का पढ़ने का बढ़ने का अधिकार दिलाएं तब जा कर होगी नारीवादिता की जीत ।”
“बाकि दिदिया ऐसा नहीं कि सभी सिगरेट शराब पीना और हर जगह अपनी वासना की गंदगी बिखेरना हर मर्द की आदत है और जो ऐसा नहीं करता वही असली मर्द है । ये वो गंदी आदतें हैं जो किसी को भी हो सकती हैं चाहे मर्द हो या औरत । ऐसे आप बस खुद को खत्म कर सकती हैं किसी से बराबरी नहीं कर सकती हैं । दिदिया हमको ऐसा बनना है जिससे लोग बेटियों के पैदा होने पर गर्व महसूस करें ना कि ऐसा कि बेटियों की दशा मौजूदा हालत से भी बद्दतर हो जाए ।” 
चलते हैं दिदिया बहुत पढ़ना है हमको क्योंकि बराबरी भी तो करनी है ना बाकि आप लगी रहिए अपनी मुहीम को आगे बढ़ाने में । जय नारी शक्ति ।” रुपाली मुस्कुराती हुई आगे बढ़ गई । लड़की बुत की तरह उसे एकटक देखती रही । एक नारी की प्रबल इच्छाशक्ति की बेयार में उसके हाथों से नारीवाद का नकली झंडा चुपके से नीचे सरक गया जिसे उसके सिवा और किसी ने नहीं देखा । 
धीरज झा

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